आखिर, रूस क्यों रोक नहीं पा रहा है आर्कटिक इलाके में तेल का फैलाव।

आखिर, रूस क्यों रोक नहीं पा रहा है आर्कटिक इलाके में तेल का फैलाव।
पिछले सप्ताह रूस (Russia) में एक डीजल का जहाज पॉवर स्टेशन से टकरा गया था. इससे वहां की एक नदी में 15 हजार टन का ईधन नदी में और 6 हजार टन का ईधन वहां की मिट्टी में फैल गया था. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin)आपातकाल लगा चुके हैं. मौसम सफाई अभियान में रुकावट डाल रहा है. इस घटना से पूरे इलाके का इकोसिस्टम (Ecosystem) तक खतरे में पड़ गया है. समस्या पर्यावरण (Environment) के लिहाज से गंभीर थी, लेकिन अब वह और भी गंभीर होती जा रही है।
कैसे हो रही है समस्या और ज्यादा गंभीर।
रूसी की मराइ रेस्क्यू सर्विस का कहना है कि इससे पहले आर्कटिक में कभी भी इस तरह की घटना नहीं हुई इस तेल को निकालना बहुत जरूरी है नहीं तो यह पानी में घुलने लगेगा. यही होने भी लगा है. रूसी फिशरी एजेंसी के प्रवक्ता दिमित्रि क्लोकोव का कहना है कि यह एक बहुत बड़ी समस्या है जिसे कम करके आंका जा रहा है. काफी ईंधन पहले ही नदी के तल तक पहुंच गया है और झील में भी पहुंच चुका है. प्रदूषित पानी को निकालने में कई दशक लग जाएंगे।
कहां हुई है यह दुर्घटना।
यह दुर्घटना उत्तरी साइबेरिया के नॉरिल्स्क शहर के पास हुई थी. इसे एम्बरनाया नदी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है जो प्यासिनों झील में जाकर गिरती है. इस झील से ही प्यासिना नदी भी निकलती है जो पूरी ताइमिर प्रायद्वीप के लिए बहुत अहम है. माना जा रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर यह आर्कटिक में पहला हादसा है और यह 1989 में अलास्का के तट पर हुए एक्सॉन वाल्डेज हादसे जितना बड़ा है. इससे पूरे आर्कटिक क्षेत्र के इलाके में गंभीर पर्यावरण की समस्या हो गई है।
क्या हुआ हादसे के बाद।
वैसे तो इस पावर स्टेशन के कर्मचारियों ने तेल के फैलाव को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इमरजेंसी सेवाओं को इसकी सूचना देने में दो दिन का समय लगा दिया. राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन इस मामले में हुई लापरवाही की तीखी आलोचना की, लेकिन जहाज की मालिक कम्पनी, नॉरिल्स्क निकल का कहना है कि उन्होंने इस मामले की जानकारी एजेंसियों को तत्काल दे दी थी. कंपनी क मुताबिक हादसे की वजह से जलवायु परिवर्तन के कारण जहाज के नीचे की बर्फ का जल्दी पिघलना थी जिसके कारण जहाज पॉवर प्लांट से टकरा गया. वहीं एक पर्यावरण विशेषज्ञ का कहना है कि अगर कंपनी ने नियमों का पालन किया होता तो हादसा टल सकता था. रूसी कानून के मुताबिक इस ईंधन के जहाज के आसपास एक कंटेनमेंट स्ट्रक्चर बनाना जरूरी होता है जिससे दुर्घटना की स्थिति में ईंधन कम से कम फैले।
सबसे बड़ी चुनौती।
इस हादसे के बाद से ही रूस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कैसे इस ईंधन को और ज्यादा फैलने से रोका जा सके और जल्द से जल्द इलाके की सफाई कराई जा सके. पर्यावरणविदों का कहना है कि यह आर्कटिक क्षेत्र में अब तक का सबसे खराब हादसा है।
क्या हुई हैं अब तक की कोशिशें।
वहीं रूसी एजेंसी तास के अनुसार मैरीटाइन रेस्क्यू सर्विस ने एक सप्ताह के भीतर 100 टन से ज्यादा का ईंधन निकाल लिया था. वहीं यह काम तेजी से अब भी जारी है. इस सर्विस ने अब तक एंम्बरनाया नदी में ईंधन के फैलाव को रोकने के लिए छह ईंधन रोधक लगाए हैं. कोशिश यही है कि यह ईंधन झील तक न जा सके. इसके अलावा नदी के ऊपर के हिस्से से भी ईंधन निकालने की कोशिश की जा रही है।
दिक्कतें भी आ रही हैं।
सफाई अभियान में भी परेशानियां कम नहीं हैं. हादसे के घटनास्थल तक पहुंचने के लिए सड़कन नहीं हैं. तेज हवाओं वाला मौसम भी सफाई अभियान में रुकावट डाल रहा है. तेल के फैलाव रोकने के लिए जो इंतजाम किए थे, तेज हवाओं से बर्फ के टुकड़े उसे तोड़ रहे हैं, इससे झील में और ज्यादा ईंधन जा रहा है. अभी तक यह तेल नदी में जाने से पहले 18 वर्ग किलोमीटर की जमीन को प्रदूषित कर चुका है।
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