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कल होगी भारत-चीन वार्ता, लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे भारतीय दल का नेतृत्व !

कल होगी भारत-चीन वार्ता, लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे भारतीय दल का नेतृत्व !

पहले भी कई बार हो चुकी है वार्ता, ब्रिगेडियर और कमांडर स्तर की वार्ता के प्रयास हुए असफल!
 
भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष जनरलों की इस हफ्ते के अंत में बैठक होने जा रही है। भारत-चीन तनाव को लेकर स्थानीय कमांडरों के बीच कई दौर चली बैठकों का कोई परिणाम नहीं निकला। इसके बाद भी जब भारत-चीन के बीच सीमा पर तनाव में कोई कमी नहीं आई तो दिल्ली और बीजिंग के बीच कूटनीतिक बातचीत पर ध्यान दिया गया। 

अब शनिवार को भारतीय सेना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के शीर्ष जनरलों के बीच तनाव को कम करने को लेकर अहम बैठक होगी। यह बैठक शनिवार को दोनों सेनाओं के लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच होगी। दोनों देशों की सेनाएं भारत-चीन सीमा पर बने गतिरोध के कारण तनाव की स्थिति को कम करने की कोशिश में जुटी हैं। बता दें कि यह बैठक लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के तट पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के लगभग एक महीने बाद हो रही है।

 भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बीच में यह झील पड़ती है, और इसके सटीक स्थान को लेकर विवाद है, जिसके कारण दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे के रास्ते में आना पड़ता है।

एलएसी के समीप दोनों देशों के बड़ी संख्या में सैनिक तैनात !

पैंगोंग त्सो झील के पास झगड़े के बाद से भारतीय और चीनी सैनिकों के लद्दाख में एलएसी के पास कई प्वाइंट्स पर तनाव की स्थिति बनी। इसके अलावा पैंगॉन्ग त्सो, गलवान घाटी और डेमचोक में भी गतिरोध की स्थिति बन गई थी। ऐसा माना जाता है कि चीन ने क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती और उपकरणों का निर्माण किया जिसके बाद भारतीय सेना को अपने सैनिक तैनात करने को मजबूर होना पड़ा था। दोनों देशों के तरफ से सैनिकों की इतनी बड़ी संख्या में तैनाती के कारण भारत-चीन सीमा पर अब भी तनाव बरकरार है।


लेह स्थित 14 कॉर्प्स के कमांडर हैं एलजी हरिंदर सिंह !

लेफ्टिनेंट जनरल (एलजी) हरिंदर सिंह लेह स्थित भारतीय सेना की यूनिट 14 कॉर्प्स के कमांडर हैं। इन्हीं की अगुवाई में दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता होने वाली है। 14 कॉर्प्स को 'फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स' के उपनाम से भी जाना जाता है। 

भारतीय सेना की यह टुकड़ी उधमपुर स्थित उत्तरी कमान का हिस्सा है। यह टुकड़ी "सबसे शत्रुतापूर्ण इलाके, मौसम और ऊंचाई की चुनौतियों" का सामना करने में काफी सक्षम है। हरिंदर सिंह ने पिछले साल अक्टूबर में 14 कॉर्प्स की कमान संभाली थी। ये अतांकवाद रोधी विशेषज्ञ भी हैं।

 इससे पहले, उन्होंने भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। ये सैन्य खुफिया महानिदेशक (DGMI), सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO), और ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स और स्ट्रैटेजिक मूवमेंट के महानिदेशक (DGOLSM) जैसे उच्च पदों पर रह चुके हैं। इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने संयुक्त राष्ट्र के एक मिशन के रूप में अफ्रीका में भी काम किया है।

 उन्होंने जम्मू-कश्मीर में युद्ध का अनुभव देखा है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह को सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया था। बाद में अपने सैन्य करियर के दौरान, लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज (DSSC) से स्नातक भी किया।

 लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (IDSA) और सिंगापुर स्थित एस. राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (RSIS) में सीनियर फैलो रहे हैं। वह एक शानदार लेखक भी हैं। लेफ्टिनेंट जनरल हरिदंर सिंह के कई निबंध और पेपर्स भी प्रकाशित हुए हैं। उनकी पुस्तक 'इस्टैब्लिशिंग इंडियाज मिलिट्री रेडिनेस कंसर्न एंड स्ट्रैटेजी' शीर्षक से जल्द प्रकाशित होने वाली है।


-ओंकार पाण्डेय की रिपोर्ट!

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