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सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं में बैंक कर्मचारी कर रहे हैं खेल...

 

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सांकेतिक चित्र

सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं में बैंक कर्मचारी कर रहे हैं खेल, ग्राहकों को कैसे मिले योजना का लाभ...


उत्तर प्रदेश -  आपको बतादें कि प्रदेश सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं ( मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजनाप्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ) में बैंक कर्मचारी जबरदस्त खेल कर रहे हैं, लोगों को तब तक दौड़ाया जाता है जब तक उनकी चप्पल न घिस जाए।


मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में लोन तभी होता है जब ग्राहक या तो बैंक से मोटी रकम ( 30 से  50 हजार रूपए ) तक का बीमा कराने के लिए तैयार हो जाए या तो शाखा प्रबंधक के द्वारा चिन्हित व्यक्ति से संपर्क करे और उसके द्वारा बताये गयी शर्तो का अनुपालन करे मतलब डील यहीं होती है, और डील होते ही शाखा प्रबंधक साहब बिजली से तेज़ रफ़्तार पकड़ लेते हैं और कुछ ही समय में उस व्यक्ति का लोन हो जाता है, अब बेचारा मरता क्या नही करता।


सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि प्रतापगढ़ जिले के शहर स्थित प्रयागराज-अयोध्या राजमार्ग के पास ही एक सरकारी बैंक कि शाखा है जिसमे शाखा में एक व्यक्ति जिसका बैंक से कोई लेना देना नहीं है उसको शाखा प्रबंधक द्वारा इसी उद्देश्य से रखा गया है वह शाखा में दिन भर बैठा रहता है और सब्सिडी वाले लोन के ग्राहक आते ही एक्टिव हो जाता है और इंटरव्यू भी वही लेता है, डील हुई तो लोन होता है नही तो नही होता है, और उसके सम्बन्ध में पूछे जाने पर शाखा प्रबंधक द्वारा बैंक स्टाफ बताया जाता है जबकि अन्य लोगों से बात करने पर यह ज्ञात हुआ उस व्यक्ति का बैंक से कोई सम्बन्ध है ही नही।

ऐसा सिर्फ उस बैंक कि एक शाखा में नही बल्कि अधिकांश शाखा में आप देख सकते हैं 

एक शायर ने क्या खूब लिखा है यह लाइन इन लोगों पर के लिए एकदम सटीक बैठती है ...
        "बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था,
       हर शाख़ पे उल्लू बैठे हैं, अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा!" 


वहीँ अब बात करते हैं ( PM SURYA GHAR YOJNA ) प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना कि इसमें तो वेंडर बेचारे झेल जाते हैं यहाँ भी वही हाल है एक वेंडर ने बताया कि बैंक कर्मचारी इस प्रकार व्यवहार करते हैं जैसे कि यह योजना ही उनके लिए बोझ है उन्होंने बताया कि आज ही एक शाखा प्रबंधक से एक ग्राहक के लोन आवेदन के सम्बन्ध में पूछने पर शाखा प्रबंधक ने बाताया कि  " क्या जी दूसरी शाखाओं में 40-40 आवेदन पड़े हैं वहां कुछ नही हमारे यहाँ 10 दिन हुए हैं आवेदन किये हुए ,एक हफ्ते बाद आईएगा फिर देखेंगे , क्या यही एक काम बचा है करने को इससे हमारा कोई फायदा नही है  "  


जिला प्रशासन भी इन मामलों में सुस्त रवैया अपना रहा है, अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन द्वारा समय-समय पर इन योजनाओं कि बैंक में लंबित फाइलों की समीक्षा नहीं की जाती है या यह सब सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित है? 

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