UP - पूर्व सांसद अतीक अहमद का भाई अशरफ गिरफ्तार, 1 लाख था इनाम !
बताते चलें कि पूर्व विधायक अशरफ के खिलाफ खुल्दाबाद और धूमनगंज सहित कई थानों में हत्या, रंगदारी, जमीन कब्जाने और धमकी देने जैसी संगीन धाराओं में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं !
बता दें अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 जनवरी, 2005 को हमलावरों ने धूमनगंज पुलिस स्टेशन के तहत नीवा क्रॉसिंग पर राजू पाल के वाहन को रोक दिया था और उन पर गोलियां चला दी थीं. राजू अपने साथियों के साथ घर लौट रहा थे, जब हमलावर दो चार पहिया वाहनों पर आए और उसका रास्ता रोक लिया था. गोलीबारी में राजू और उसके दो सहयोगी देवीलाल पाल और संदीप यादव की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य, रुकसाना, सैफ, उर्फ सैफुल्ला और ओम प्रकाश पाल को गोली लगी थी !
Prayagraj: Police arrests Khaild Ajim alias Ashraf (in pic), the brother of Atiq Ahmed - former MP and accused in the murder case of BSP MLA Raju Pal. Ashraf was carrying a reward of Rs 1 Lakh on his head. pic.twitter.com/PH6YUUyNTy
— ANI UP (@ANINewsUP) July 3, 2020
उसी दिन राजू की पत्नी पूजा पाल ने एफआईआर दर्ज कराई थी. धूमनगंज पुलिस स्टेशन में अतीक, अशरफ और सात अज्ञात लोगों पर मारपीट, हत्या की कोशिश और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है. उनके विवाह के नौ दिन बाद ही यह घटना घटी !
प्रयागराज पुलिस ने 6 अप्रैल, 2005 को एक स्थानीय अदालत में अतीक और अशरफ़ सहित 11 लोगों के खिलाफ एक आरोप पत्र दायर किया और पुलिस के अनुसार, राजू ने प्रयागराज पश्चिम सीट से 2004 का विधानसभा उप-चुनाव जीता था, जिसमें सपा सांसद अतीक अहमद के भाई अशरफ की हार हुई थी. 2004 के लोकसभा चुनाव में अतीक के फूलपुर से सांसद बनने के बाद यह सीट खाली कर दी गई थी. राजू ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले अशरफ को हराया था. दिसंबर 2008 में, तत्कालीन राज्य सरकार ने यूपी सीबी-सीआईडी को जांच स्थानांतरित कर दी, जिसने मामले के सात अन्य आरोपियों को आरोप पत्र सौंपा. मामले की जांच बाद में 22 जनवरी, 2016 को सीबीआई को हस्तांतरित कर दी गई थी !
बता दें कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके छोटे भाई, पूर्व विधायक अशरफ उर्फ खालिद अजीम सहित 10 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. तब से अशरफ फरार चल रहा था. एजेंसी ने सात अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दी थी, जिन्हें पहले स्थानीय पुलिस और बाद में यूपी क्राइम ब्रांच-क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबी-सीआईडी) ने चार्जशीट किया था, जिसमें कहा गया था कि उन्हें उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था !
प्रयागराज पुलिस ने 6 अप्रैल, 2005 को एक स्थानीय अदालत में अतीक और अशरफ़ सहित 11 लोगों के खिलाफ एक आरोप पत्र दायर किया और पुलिस के अनुसार, राजू ने प्रयागराज पश्चिम सीट से 2004 का विधानसभा उप-चुनाव जीता था, जिसमें सपा सांसद अतीक अहमद के भाई अशरफ की हार हुई थी. 2004 के लोकसभा चुनाव में अतीक के फूलपुर से सांसद बनने के बाद यह सीट खाली कर दी गई थी. राजू ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले अशरफ को हराया था. दिसंबर 2008 में, तत्कालीन राज्य सरकार ने यूपी सीबी-सीआईडी को जांच स्थानांतरित कर दी, जिसने मामले के सात अन्य आरोपियों को आरोप पत्र सौंपा. मामले की जांच बाद में 22 जनवरी, 2016 को सीबीआई को हस्तांतरित कर दी गई थी !
बता दें कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके छोटे भाई, पूर्व विधायक अशरफ उर्फ खालिद अजीम सहित 10 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. तब से अशरफ फरार चल रहा था. एजेंसी ने सात अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दी थी, जिन्हें पहले स्थानीय पुलिस और बाद में यूपी क्राइम ब्रांच-क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबी-सीआईडी) ने चार्जशीट किया था, जिसमें कहा गया था कि उन्हें उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था !
गौरतलब है कि अशरफ वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले से ही फरार है. अशरफ की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था जिसे बाद में बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया था. सूत्रों की मानें तो पुलिस ने कई बार अशरफ के घर दबिश दी थी और तीन बार कुर्की की कार्रवाई को भी अंजाम दिया था. लेकिन इसके बावजूद अशरफ पुलिस और क्राइम ब्रांच के हाथ नहीं लगा पाया. हालांकि अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है !

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