खदानों में काम करने वाली लड़कियों को मजदूरी देने के बजाए ठेकेदार उनके जिस्म का सौदा करते हैं। खदानों में काम करने वाली अधिकांश लड़कियां नाबालिग है।
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खदानों में काम करने वाली एक नाबालिग लड़की |
उत्तर प्रदेश में ऐसा नरकलोक जहां दो जून की रोटी और चंद सिक्कों के लिए बेटियां हवस का शिकार बन रही हैं। ये नरकलोक है दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर बुंदेलखंड के चित्रकूट में है। चित्रकूट के कर्वी नाम के गांव के गरीबों की नाबालिग बेटियां रोटी के लिए खदानों में काम करने को मजबूत हैं। चित्रकूट के कर्वी स्थित खदानों के ठेकेदार और बिचौलिये उन्हें काम की मजदूरी नहीं देते। मजदूरी पाने के लिए इन बेटियों को अपने जिस्म का सौदा करना पड़ता है। चित्रकूट के इन खदानों में अधिकांश नाबालिग लड़कियां ही काम करती है। यहां के ठेकेदार इनके काम का मेहनताना नहीं देते वरन् उनके जिस्म का सौदा करते हैं। चित्रकूट के इस नरक में 10 से 18 साल की लड़कियों का यौन शोषण किया जाता है। हमारे संवाददाता ने यहां की लड़कियों से बात की तो उन्होंने बताया कि पेट के लिए ये सब कुछ करना पड़ता है, मना करने पर मालिकों से पिटाई भी खानी पड़ती है। वे आगे कहती हैं कि हमारे साथ ऐसा नहीं होना चाहिए, ये सब हमसे और नहीं हो पाएगा। इज्जत रोज-रोज कोई नहीं बेचेगा। यूपी के इस गांव में मौत से भी बदतर है इन बेटियों की ज़िन्दगी। ये लड़कियां बताती हैं कि यहां के खदानों में काम करने के लिए ठेकेदार पहली यही शर्त रखता है कि अगर यहां काम करना है तो शरीर देना है पड़ेगा। चित्रकूट का यह कर्वी गांव आजाद हिंदुस्तान का सबसे भयावह नरकलोक है, जहां पर गरीबी एक बहुत भद्दी गाली के जैसे है। ऐसे नरक में पल रही ज़िन्दगी एक अभिशाप ही है। दो जून की रोटी के लिए यहां बेटियों को हड्डियां गला देने वाली मेहनत करनी पड़ती है, और मजदूरी के तौर पर उन्हें अपने जिस्म का सौदा करना पड़ता है। यूपी के इस सबसे वीभत्स गांव के आस-पास अवैध खनन धड़ल्ले से चलता है। सियासतदानों के बड़े-बड़े बोल और उनकी वादों से आज भी यह गांव वंचित है। इन बेटियों को उस नरक से उबारने के लिए जरूरी है सच को अपनाना। लेकिन फिर भी ये सवाल खड़ा होता है कि क्या इनकी दुर्दशा देखने वाला कोई नहीं है यहां? एक तरफ भारत सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है वहीं दूसरी तरफ जब देश के सबसे बड़े सूबे के इस गांव की बेटियों कि दुर्दशा देखी जाती है तब सभी दावों और नारों कि पोल खुलती दिख जाती है। यहां की बेटियां सरकार से आज भी उम्मीद लगाए बैठी हैं कि कब से इस वीभत्स नरक से बाहर निकलेंगी। सरकार कब इनकी भी दुर्दशा से अवगत होगी। इसी उम्मीद में यहां की एक बड़ी आबादी अपनी दुर्दशा से निजात पाने के लिए सरकार के ओर टकटकी निगाह लगाए हुए उम्मीद के साथ आज भी आशान्वित हैं।
मामले को संज्ञान में लेते हुए स्थानीय जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश !
चित्रकूट के इन महिलाओं की स्थिति से अवगत होते हुए जिलाधिकारी चित्रकूट ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं।
डीएम चित्रकूट ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि अभी-अभी मैंने आजतक चैनल पर प्रसारित विशेष रिपोर्ट को देखा, वर्णित घटना क्रम की गहन जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश कर दिए हैं। इस निंदनीय कृत्य मे जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।'
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