चीन को अमेरिका में मिल गया ये बड़ा मौका !
कोरोना महामारी की वजह से दुनिया भर में घिरे चीन को अमेरिका पर पलटवार करने का मौका मिल गया है. अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मौत को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर चीन ने उसे घेरा है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन ने सोमवार को कहा कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों को लेकर दोहरे मानदंड अपना रहा है!
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका हॉन्ग कॉन्ग के प्रदर्शनकारियों की तो तारीफ करता है लेकिन जब उसके यहां लोग प्रदर्शन कर रहे हैं तो वह उन्हें दंगाई करार दे रहा है. प्रवक्ता ने कहा कि हॉन्ग कॉन्ग और अमेरिका में विरोध-प्रदर्शनों के पीछे अलग-अलग ताकतें थीं!
झाओ ने कहा, हॉन्ग कॉन्ग के प्रदर्शनों के दौरान देश को बांटने के लिए आंतरिक और बाहरी ताकतों ने मिलकर काम किया था. इन ताकतों ने सत्ता को उखाड़ फेंकने और आतंकी हमले कराने की कोशिशें कीं. उन्होंने कहा, आजादी समर्थक आंदोलन और काले कपड़े पहने दिखाई दी भीड़ ने राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया!
अमेरिका में मिनीपोलिस में पुलिस कस्टडी में एक अश्वेत की मौत के बाद से जमकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. जॉर्ज फ्लॉयड की मौत 25 मई को हुई थी. 25 मई की ही शाम को पुलिस को एक फोन आया था कि एक ग्रॉसरी स्टोर पर जॉर्ज फ्लॉयड नाम के शख्स ने 20 डॉलर का नकली नोट दिया है. पुलिस वाले फ्लॉयड को गिरफ्तार कर अपनी गाड़ी में बैठाने की कोशिश कर रहे थे, तभी फ्लॉयड गिर गए!
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दिखता है कि जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन को एक श्वेत पुलिस अफसर ने कई मिनटों तक अपने घुटनों के नीच दबाए रखा जबकि फ्लॉयड लगातार चिल्ला रहा था कि उसे सांस नहीं आ रही है. फ्लॉयड की हालत खराब होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां एक घंटे बाद ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. पुलिस अफसर डेरेक चौविन पर थर्ड डिग्री मर्डर और हत्या का आरोप लगाया गया है!
चीनी प्रवक्ता ने कहा, इस घटना से पता चलता है कि अमेरिका में नस्ली भेदभाव की समस्या कितनी गंभीर है और इसे तुरंत सुलझाने की जरूरत है. झाओ ने कहा कि अल्पसंख्यकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा करनी चाहिए!
अमेरिका में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच चीन की सोशल मीडिया पर भी लोग आरोप लगा रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन ने हॉन्ग कॉन्ग में अशांति फैलाने में भूमिका अदा की!
एक यूजर ने लिखा, अमेरिका अपने आंतरिक मामलों को संभाल नहीं पा रहा है तो फिर वह दूसरे देशों के घरेलू मामलों में कैसे दखलअंदाजी कर सकता है?
हॉन्ग कॉन्ग चीन के 'वन नेशन, टू सिस्टम' का हिस्सा है यानी उसे प्रशासन के मामले में चीन से स्वायत्तता हासिल है. हालांकि, पिछले साल से ही हॉन्ग कॉन्ग में किसी अपराध के शक में लोगों को चीन प्रत्यर्पित करने वाले कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि चीन इस कानून से हॉन्ग कॉन्ग की कानूनी स्वायत्तता खत्म करना चाहता है!



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